गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

रास्तों में फसकर ,कोई मंजिल खोज रहा हूँ


रास्तों में फसकर ,कोई मंजिल खोज रहा हूँ 
दुनियां में अपना कोई तो होगा हमसफर,खोज रहा हूँ 

दिलों के रिश्ते टूट जाते हैं जल्द क्यूँ ??
इनके बीच का इफेक्ट क्या है, खोज रहा हूँ 

क्यूँ अपने बनाकर लोग भूल जाना करते हैं पसन्द
रिश्तों में क्यूँ आता है डिफेक्ट ,खोज रहा हूँ 

मैंने दुनियां को आजमाने के वास्ते,खुद को दर्द देकर देखा 
लोगों ने मजे लिए मेरे दर्द के ,कारण खोज रहा हूँ 

रास्तों में फसकर ,कोई मंजिल खोज रहा हूँ 
दुनियां में अपना कोई तो होगा हमसफर,खोज रहा हूँ 

फंस गयी भंवर के बीच समन्दर में कस्ती मेरी ,
साहिल तो अभी दूर है ,कोई तिनका खोज रहा हूँ 

अपनी मुहोब्बत में लूट लिया गया हमको,दिल से
वेवजह के कारणो में खो ,तुमको खोज रहा हूँ 

रास्तों में फसकर ,कोई मंजिल खोज रहा हूँ 
दुनियां में अपना कोई तो होगा हमसफर,खोज रहा हूँ 

दाऊ जी 

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