गज़ल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गज़ल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

तू हो मेरे रुबरू, न शिकयतें न गुफ्तगू ,

आ तुझे पा लूँ , और फिर से तुझे खोऊँ मैं,
तू भी जागे मेरी याद में, तुझे भूल कर के सोऊँ मैं।

तू हो मेरे रुबरू, न शिकयतें न गुफ्तगू ,
न फासला हो दरमियाँ,तुझसे लिपट के रोऊँ मैं।

इक चाँदनी सी रात हो, तेरा और मेरा साथ हो
ये जनम जनम की बात हो इक ख्वाब ये सजाऊँ मैं।

कैसे कहूं तू दूर है, क्यूँ मान लूँ कि जुदा हैं हम,
तू साँसों में थी खो गई, तुझे धड़कनों में पाऊँ मैं।

मेरा ख्वाब तू, दीदार तू, तू मुक्ति है, संसार तू,
तू आती है हर साँस में, कैसे तुझे भुलाऊँ मैं।

अब तुझको क्यूँ याद करूँ, क्यूँ फिर से तुझे बुलाऊँ मैं
तू चली गई तो चली गई, क्यूँ अपना दिल जलाऊँ मैं।

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

रात भर रहती है एक ही ख्वाहिश दिलमे

दिलकी धडकन भी अब लगती है गुफ्तगू तेरी
मेरी सांसों मे सदा महके है खुशबू तेरी

चांद खुद इसकी गवाही था फलक पर उसदम 
जब सितारों ने मिलके की थी आरजू तेरी

आ कभी झांक आईने मे मेरे ख्वाबों के
तुझको दिखलाउं तमन्नायें हूबहू तेरी

जहनो दिल से लिपटता है तसव्वुर तेरा 
मेरे सिने से लिपटती है आहु आहु तेरी

सुबह से शाम तलक शाम से सुबहा तलक
निगाहे तिश्ना को रहती है जुस्तजू तेरी

रात भर रहती है एक ही ख्वाहिश दिलमे
अपनी आँखों पे रोज धूप मै मलू तेरी

न खुदा की न मसीहा की हुकूमत है यहां
मेरे दिल पे फकत चलती है तू तू तेरी

रोज आशिकी मे पर फिर जाता हुं बेदार तक

जीस्त है बस मरमरी दो बाहों के इक हार तक
कामयाबी नाकामयाबी सिमटी नही जीतहार तक

मेरी तनहाई की जंग जब तेरी ख्वाईश से हुई
छत पे बैठा बैठा मै उडा चांद के उस पार तक

मेरे लिये जन्नतकी हद सदियोंसे है इस ही तरहा
होकर मेरे दिलसे शुरु फैली हुई दिलदार तक

झूठको बैठे बिठाये मिल गये ग्राहक कई
सच पहुंच ना पाया दुनिया मे कभी खरीददार तक

रोज खाली हाथ अपने होश मे आता हुं मै
रोज आशिकी मे पर फिर जाता हुं बेदार तक

मुझे क्या पता के है कहांतक ये सफर अहसासका
इनकार तक लगता है लगता है कभी इकरार तक

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

दिलकी महफिल सजाये गज़ब हो गया

वो निगाहों मे आये गज़ब हो गया
इस तरहा मुस्कराये गज़ब हो गया

यक ब यक कह उठा दिलका सहरा मेरा
दिलकी महफिल सजाये गज़ब हो गया

जब मयस्सर हुई मुझको तनहाइयाँ
ख्वाबों ने गीत गाये गज़ब हो गया

ख्वाहिशों के परिन्दें युं उड़ने लगे
दिल उठा करके हाये गज़ब हो गया

जानेमन जबसे गुजरा है राहों से वो
रंग है उलफत के छाये गज़ब हो गया

रात मे चैन है ना अब दिनमे करार
हाले दिल क्या सुनाये गज़ब हो गया

किसतरहा से ये दिलभी है उसका मुरीद
चोट हस हस के खाये गज़ब हो गया

उनसे लेना न देना हकीकत मे कुछ
पर लगे ना पराये गज़ब हो गया

दिखते है मुझे प्यार मे पागल जहां दिल

कहता है कहीं कोई कहे कोई कहीं है
मैने तो सुना था सारी ही उसकी ज़मीं है

दिखते है मुझे प्यार मे पागल जहां दिल
लगता है मुझे बस वो यहीं बस वो यहीं है

चांदको मैने फिर कभी देखा न गौर से
नजरों को भायी जबसे इक माहजबीं है

हज़ार परदों मे तू छुप के बैठ जा लेकिन
मै ख्वाब बन के आउंगा गर तू पर्दानशीं है

हसीन होने पे अपने गूरूर ज्यादा न कर
तू हसीं होगा मगर प्यार तेरा तुझसे हसीं है

अब ये सूरजके पुजारी कोभी कहां है खबर
रात किस हालमे सूरज रहा कहांपर मकीं है

जहां पे मौत का सैलाब आते रहता है
इश्क मे वो भी विराना लगता दिलनशीं है

मगर तेरी मुहब्बत को कशमकश कह नही सकते

ये माना तेरे दिवाने को मैकश कह नही सकते
मगर बेहोशी बिनभी खा गया गश कह नही सकते

कशमकश से ज़माने की इबादत पार कर देगी
मगर तेरी मुहब्बत को कशमकश कह नही सकते

बहारें है नज़ारें है के जन्नत होती है जन्नत 
मगर जन्नतको तुझसे ज्यादा दिलकश कह नही सकते

बुरी बातें सही मेरी बुरी आदत सही मेरी
मगर इक दिलके रोगीको बादाकश कह नही सकते

हज़ारों कारवां लूटे तेरे जिस हुस्ने कातिल ने
रहनुमा उसको कह देंगे खुदा बस कह नही सकते

रोज मिलते रहो धीरे धीरे खुशी मे ज़हर पी लेंगे
जहरो सम को दवाई भी तो बरबस कह नही सकते

अदा हसीं लहजा हसीं तकना हसीं चलना हसीं
तीर कितने लिये है तेरे तरकश कह नही सकते 


कभी लफ्ज़े मुहब्बत अपना अपने काम ना आया
मगर अब मौसमे उलफतको सरकश कह नही सकते

अपनी फितरत मे मुहब्बत शुमार करके देखो

वक्त के रहते रहते वक्त को प्यार करके देखो
अपनी फितरत मे मुहब्बत शुमार करके देखो

इम्तहां से गुज़रना पडता है
जिंदा रहने को मरना पडता है
मुझ मे जिंदा भी मै हुं के नही पुकार करके देखो

इस परिंदे मे जान हो कबतक
जाने इसकी उड़ान हो कबतक
दिलकी बाहों मे कभी खुद को बेकरार करके देखो

जितनी बटनी थी बट गई है ज़मीं
अब निगाहें है आसमां पे कहीं
अब तो खुदगर्ज़ीसे इस खुदको दरकिनार करके देखो

रफ्तारे दुनिया अजीब लगती है
होश ख्वाब बेखुदी हबीब लगती है
हिर्स ओ हवस की जरा कम रफ्तार करके देखो

सफर जो है ये मुहब्बत का कहीं थमता नही

युं न दुश्मनकी किसी बातको सच कर जाना
धक्का देकर मुझे सरे राह ना गुज़र जाना

वो अब भी बैठ के ख्वाबों मे सिसकती होगी
उम्मीदों ने कहां सिखा है हार मर जाना

सफर जो है ये मुहब्बत का कहीं थमता नही
पता नही है भावनाओं को ठहर जाना

जो इन्तेज़ारी मे है लुत्फ वो मिलन मे नही
रहे हसरत मे खौफे हिज्र से क्या डर जाना

दिलको गम से कभी निजात मिलने वाली है
जिसने ये जाना राजे दिलको मुख्तसर जाना

गलतफहमी की ये दुनिया भी अजब दुनिया है
जिससे धोखा मिला उसको ही मोतबर जाना

चांद पूनम का मयस्सर हो रोशनी के लिए
रोशनी को पर तेरी हां ना पे मुनहसर जाना

गमे इश्क से इस बढ़के कोई गम तो नही है

गमे इश्क से इस बढ़के कोई गम तो नही है
मै जिंदा हुं अबतक ये कोई कम तो नही है

सैलाब जमाने मे हर सुं आया हुआ है
उपर किसी आशिककी नजर नम तो नही है

हालात बहोत बिगडे हुये से है चमन मे
जुल्फों मे तेरी देख कोई खम तो नही है

रातों मे मुझे युं लगा जब छतपर हुयी रिमझिम
पाजेब की तेरी कहीं छम छम तो नही है

रब भी न बचा पाया दिवाने को कतल से
कातिल कहीं तेरा हुस्ने मुजस्सम तो नही है

दावा है मेरा तुझको भुला दूंगा मै इक दिन
हालाकी इस दावे मे कोई दम तो नही है

घडी भर के लिये था पर दिल हो गया दिवाना

इक शामे दिलकशी सा तेरा जिन्दगी मे आना
घडी भर के लिये था पर दिल हो गया दिवाना

तेरी नीमबाज आँखें है फरेब जाने जाना
मिलतेही धडके दिल और छलके सब्र का पैमाना

समझा है कब कली ने पर एतमादे हुस्न क्या है
है बहार तो वजुद है कब गुल्शितां ने माना

जबसे तेरी तमन्ना तेरी आरजू मे गुम हुं
उस अजनबी सा हुं मै जिसे खुदने ना पहचाना

उम्मीदका मायुसी का अब है साथ इसतरहा का
इकका सुबह सुबह आना इकका शामशाम जाना

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

माहताब के माथे पे दिलकश

तेरी बेमिसाल मुस्कुराहटें उफ तेरा ये ताबिंदा जमाल
के बडा अजीब सा हो जाता है तुझे देखनेवालों का हाल

मौसम है गमका या कैफ का ये सवाल नही कोई सवाल
तेरी याद जब भी आती है आ जाता है लहू मे ऊबाल


माहताब के माथे पे दिलकश ख्वाबों का हो नज़ारा ज्युं
हर इक खुशी तो है बस तेरे लहराते दामन का कमाल

इश्क मे तेरे मैने अहा तुफां को साहिल पढ लिया
और दर्दको खुशियां समझ के खिचवा आया दिलकी खाल

रुत खिजांकी हो महका गुलाब खिल जाये गुलशनका शबाब
तु आ जाए इक लम्हेको गर और जो दे चमन पे निगाह डाल

कितनी हसीं है शाम कोई गीत सुनाओ


कितनी हसीं है शाम कोई गीत सुनाओ
हो गम हर इक तमाम कोई गीत सुनाओ

मौसम है ख्वाहिशों का और तन्हाईका आलम
ना लो और इन्तेकाम कोई गीत सुनाओ

मैखाने से मदहोशी के बेताब हसरतों 
उलफत के आये जाम कोई गीत सुनाओ


घूंघट उठा के फुलोँ का रंगों के सहन मे
खुशबू करे सलाम कोई गीत सुनाओ

ख्वाबिदा आरजूओं मेरे साथ उसको भी
दे वस्ल का पैगाम कोई गीत सुनाओ

लम्हे है हिज्र के पर एहसास के लम्हों
लेकर के मेरा नाम कोई गीत सुनाओ

बुधवार, 19 दिसंबर 2018

ए चमन मुझसे दोस्ती कर ले


राह मे मै भी राह मे तु भी
मै भी और कैदे आह मे तु भी

दिलकी हुं बारगाह मे मै भी
दिलकी है ख्वाबगाह मे तु भी

ए चमन मुझसे दोस्ती कर ले
हश्र की है निगाह मे तु भी

शहरे उल्फत की आ हवा खाले
सिख जायेगा वाह वाह तु भी

दिल किसीके तन किसी के साथ
शरीक है गुनाह मे तु भी

है मसर्रत के दोनो दावेदार
गम मे मै भी कराह मे तु भी

ए मेरे दोस्त समा जा आ जा
धड़कनों की पनाह मे तु भी

बेजुबां होता है ये बा जुबां नही होता

लफ्जों मे इश्क का इस तर्जुमां नही होता
बेजुबां होता है ये बा जुबां नही होता

इश्क से बढ के कोई सायेबां नही होता
इश्क का दुनिया मे पर पासबां नही होता

फसाना इश्क का जन्नत से भी पुराना है
ये गम है वो जो कभी दास्तां नही होता

मै उसके पीछे वो किसी और के पीछे
सब्र का इस से बडा इम्तेहां नही होता

इश्क की हद है बेहद से और बेहद तक
हद इसकी कोई ज़मीं आसमां नही होता

उसका कहना है के मै भुल जाउँ अब उसको
भूलने वाला कभी बदगुमां नही होता

कोई कहता है दैर मे है कोई हरम मे है बस
वो वहां होगा मगर वो कहां नही होता

जानलेवा है खलीश कितनी ये मुहब्बतकी 
सिवाये खुद के जिसका राजदां नही होता

कोई कहता है जले ये तो कोई कहता है वो
बगेर आग पर सच मे धुआं नही होता

तलाशने से नही मिलता सुरागे इश्क कभी
जहां तलाशो इसे ये वहां नही होता

रविवार, 16 दिसंबर 2018

देख के जिसको चांद तारे ये जल जाते है

तीर जब दिलपे निगाहों के ये चल जाते है
सारे मंजर ही फज़ाओं के बदल जाते है

हज़ार सब्र के परदों मे छिपे हो लेकिन
आतिशे हुस्न से अरमान पिघल जाते है

मोड होते है जवानी के संभलने के लिये
और सभी लोग यंही आके फिसल जाते है

जब से देखा है उसे निंद कहां आती है
ख्वाब आते है और आते ही मचल जाते है

चांदनी डालती है अपना दुशाला उसपर
मौसमे गुल रंग चेहरे पे मल जाते है

चांद को देखा नही जबसे उसे देखा है
देख के जिसको चांद तारे ये जल जाते है

असेसी और प्यार 😉

  इश्क़ और काम में एक रार सी ठन गई है, असेसी ही जबसे मेरा यार बन गई है ​खुद को कहती रही है वो baddie , और मुझको दिखी है हमेशा जो teddy ​वो ...