बुधवार, 19 दिसंबर 2018

बेजुबां होता है ये बा जुबां नही होता

लफ्जों मे इश्क का इस तर्जुमां नही होता
बेजुबां होता है ये बा जुबां नही होता

इश्क से बढ के कोई सायेबां नही होता
इश्क का दुनिया मे पर पासबां नही होता

फसाना इश्क का जन्नत से भी पुराना है
ये गम है वो जो कभी दास्तां नही होता

मै उसके पीछे वो किसी और के पीछे
सब्र का इस से बडा इम्तेहां नही होता

इश्क की हद है बेहद से और बेहद तक
हद इसकी कोई ज़मीं आसमां नही होता

उसका कहना है के मै भुल जाउँ अब उसको
भूलने वाला कभी बदगुमां नही होता

कोई कहता है दैर मे है कोई हरम मे है बस
वो वहां होगा मगर वो कहां नही होता

जानलेवा है खलीश कितनी ये मुहब्बतकी 
सिवाये खुद के जिसका राजदां नही होता

कोई कहता है जले ये तो कोई कहता है वो
बगेर आग पर सच मे धुआं नही होता

तलाशने से नही मिलता सुरागे इश्क कभी
जहां तलाशो इसे ये वहां नही होता

... कार्ल मार्क्स हो गया हूं

कहां पूरा एटम था, अब क्वॉर्क्स हो गया हूं तेरी मोहब्बत में कार्ल मार्क्स हो गया हूं तेरा इश्क बुर्जुआ था, मैं रहा प्रॉलेटेरियट ही तू सोविय...