मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

----------****** तमन्ना********----- ----------******तमन्ना********----- तु मेरी किस्मत मे नही, फिर भी तुझे पाने की तमन्ना है। मैं तुझको चाहता हुँ, फिर से मिलने की तमन्ना है। मैं तेरे हुस्न का दीवाना भी नही, फिर भी तुझको चाहता हुँ। मिलता हुँ जब भी तुमसे, अक्सर खुद को भूल जाता हुँ। मेरी बन्द आँखो में तेरी तस्वीर नही, फिर भी तुझे चाहता हुँ। बस गूँजती है तेरी आवाज कानों में, उसे ही तुझे मानता हुँ। मेरी तमन्ना कभी तुझे देखने की नही, बस तुझे पाना चाहता हुँ। कोई नही सहारा तेरा इस जहाँ में, तुझको अपना काँधा देना चाहता हुँ। भले ही देख नही सकता दुनियाँ में, पर सब की नजर पहचानता हुँ। अन्धा हुँ तो क्या हुआ, सबकी औकात जानता हुँ। तुझको बचा लू उनसे, यही तमन्ना है। तुम रहो मुस्कुराती हमेशा, यही तमन्ना है। जी.आर.दीक्षित 30-04-2013

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

असेसी और प्यार 😉

  इश्क़ और काम में एक रार सी ठन गई है, असेसी ही जबसे मेरा यार बन गई है ​खुद को कहती रही है वो baddie , और मुझको दिखी है हमेशा जो teddy ​वो ...