अक्सर अक्श आपका
मुझको मिलता हैं,
जब तन्हा होती हूँ
साथ चलता हैं।
डॉ. सोनल
मुझको मिलता हैं,
जब तन्हा होती हूँ
साथ चलता हैं।
डॉ. सोनल
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कहां पूरा एटम था, अब क्वॉर्क्स हो गया हूं तेरी मोहब्बत में कार्ल मार्क्स हो गया हूं तेरा इश्क बुर्जुआ था, मैं रहा प्रॉलेटेरियट ही तू सोविय...
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