तू जले जो तो चिराग क्यूँ जलाऊं ,
तू हसें तो फूल क्यूँ बरसाऊ,
पता है सुनकर तुझे हसी आएगी,पर सच है
जो तूं रोये तो मैं क्यूँ खेत में पानी लगाऊं,
तू हसें तो फूल क्यूँ बरसाऊ,
पता है सुनकर तुझे हसी आएगी,पर सच है
जो तूं रोये तो मैं क्यूँ खेत में पानी लगाऊं,
दाऊ जी
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