मत ओढना मायूसी की चादर
संभालो इन अश्कों के मोती को
बयाँ न कर दर्दे दिल की दास्ताँ
चाहने वाले खुद समझ लेंगे हमारी दास्ताँ
गायत्री शर्मा
संभालो इन अश्कों के मोती को
बयाँ न कर दर्दे दिल की दास्ताँ
चाहने वाले खुद समझ लेंगे हमारी दास्ताँ
गायत्री शर्मा
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