बुधवार, 9 अप्रैल 2014

थी ना कमी कोई? कभी इस मै के जाम में,(Loss was not? For this I am ever in a jam,)

थी ना कमी कोई? कभी इस मै के जाम में,
पैगाम गलत हुआ था, रश्के-इंतकाम में।

अपनी रंगत है सबकी और अपना ही ख्याल,
ये बरहक़ है कुछ खराबी तो आती है ईमान में।

इस मैकशी ने 'असद' को 'ग़ालिब' बना दिया,
बरना हुए हैं कितने ही शायर जहान में।

मशहूर इश्क से नहीं वो मैकशी से है, आज भी
'देवदास' जुडता है हर मैकश के नाम में।

कासिद को कुछ न बोलिए, बेशक नशे में था,
खामियां रहीं थीं कुछ तुम्हारे पते के पयाम में।

मैं तरफदार नहीं हूँ मैकशी का 'अली',
पर कुछ तो है, जो पूरा है इस इम्तिहान में।

Loss was not ? For this I am ever in a jam ,
The message was wrong , Rske - Intequam .

Everyone has their own texture and its own care ;
If something is wrong in Brhkh believe it .

The Makshi the ' Assad to' Ghalib ' made
Berna are so many poets in the macrocosm .

Makshi It is not known with love , even today
' Devdas ' links in the name of each Maks .

Casid not say anything , of course, was drunk ;
Payam were some flaws in your address .

I 'm not bias Makshi 's ' Ali '
Something on which to complete this test .

ए.एस. खान जी 

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