पलक-अपलक
निहारती तुम्हें,
चातक सी
चाहती तुम्हें
डॉ. सोनल
निहारती तुम्हें,
चातक सी
चाहती तुम्हें
डॉ. सोनल
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इश्क़ और काम में एक रार सी ठन गई है, असेसी ही जबसे मेरा यार बन गई है खुद को कहती रही है वो baddie , और मुझको दिखी है हमेशा जो teddy वो ...
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