शनिवार, 27 सितंबर 2014

मुझे अकेले नही सारे देश को है,

दर्द से है बुरा हाल मेरा
,क्या है,
कैसा है,
क्युँ है,
समझ से परे है,
अन्जान हुँ,
परेशान हुँ,
हैरान हुँ,
कुछ उदास हुँ,
चेतना में अवरोध है,
चिन्तन पर रोक है,
मन्थन शेष है,
दिमाग सुन्न है,
विचार शुन्य है,
साथ में क्रोध है,
भले ही ये क्षणिक है,
पर भीषण विकट है,
ये खुद पर नही,
खुद के कर्म पर नही,
ये समाज में व्याप्त अराजकता पर है,
कुछ दुष्टो की दुष्टता पर है,
कुछ नीचो के कर्मो पर है,
नारी की असुरक्षा पर,
कानून की गिरती गरिमा पर,
ये किसी खास को नही,
हर आम को है,
मुझे अकेले नही सारे देश को है,

जी आर. दीक्षित

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