शनिवार, 8 मार्च 2014

कवि और शायर

कवि और शायर  में फर्क होता है
दिल में गम हजारों छुपे हैं
 मगर समझ नहीं सकता
ये जमाना उसका दर्द
जिसके चेहरे पर हर पल
 एक प्यारी सी मुस्कान होती है
कवि भावों को अनुभूति तथा
 अंतर्मन की वेदना व खुशी को
 शब्दों के माध्यम द्वारा
अलंकृत कर बयाँ करता है
और वही शब्द लोगों के लिए
 एक सुंदर काव्य बन जाता है
शायर क्या जाने कविता के स्वर
 व  भावभंगिम भावों को
जो कभी चाँद तारों को तोङने
जहाँ को कदमों में रखने जैसे
 शब्दों को बढा-चढा कर पेश करे!
माना  कि गम उसे भी है
बयाँ वह भी कर रहा है
परंतु एक कवि व उसकी सारगत
 कविता की तुलना में कोसों दूर
!!"गायत्री शर्मा" 

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