कुछ ना सूझे जब
सफर हो कठिन तब
जो चल ना सके ये कदम
निराशा को आशा में बदल
बेफिक्री से आगे बढते जा
मायूसी को मुस्कान मे बदल
"गायत्री शर्मा"
सफर हो कठिन तब
जो चल ना सके ये कदम
निराशा को आशा में बदल
बेफिक्री से आगे बढते जा
मायूसी को मुस्कान मे बदल
"गायत्री शर्मा"
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