भटकने लगे युवा,
भटकने लगा देश ,
भ्रमित हुए सब
अपने-अपने पथ से ,
बचा क्या है
जब संस्कार मिटने लगे ,
निज स्वार्थ में ,
भूले सब देश ,
दाऊ जी
भटकने लगा देश ,
भ्रमित हुए सब
अपने-अपने पथ से ,
बचा क्या है
जब संस्कार मिटने लगे ,
निज स्वार्थ में ,
भूले सब देश ,
दाऊ जी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें