ब्लॉग पर प्रकाशित हर लेख कॉपीराइट अधिनियम के तहत आता है एवम् हर रचना का कॉपीराइट अधिकार उसके पास सुरक्षित है। बिना अनुमाति किसी भी रचना को प्रकाशित करने या कॉपी पेस्ट करने पर आपको कॉपीराइट अधिनियम की धारा के उलंघन का दोषी समझा जाएगा और आप पर कानूनी कार्यवाही करने के लिए हम पूर्ण तौर पर स्वतन्त्र है। जी.आर.दीक्षित
रविवार, 20 जुलाई 2014
ओढ लिया जाने क्यों मैने मायूसी की चादर को समझ सके ना जमाना मेरे अंतर्मन के भावों को चाह नहीं जीने की मन में गर खुदगर्जी में जीना हो ओढ लिया जाने............. खुशियाँ मेरे दामन में बिखरी जैसे कल्पवृक्ष हो घट में अक्सर मैने यह देखा है चाहतें स्वयं पूरी हो जाती ओढ लिया जाने............ खुश रहने के बहाने बहुत है दुखी होने का एक कारण काफी फिर भी जाने क्यों लगता है नीरस मेरा जीवन है ओढ लिया जाने क्यों मैने मायूसी की चादर को! गायत्री शर्मा
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
... कार्ल मार्क्स हो गया हूं
कहां पूरा एटम था, अब क्वॉर्क्स हो गया हूं तेरी मोहब्बत में कार्ल मार्क्स हो गया हूं तेरा इश्क बुर्जुआ था, मैं रहा प्रॉलेटेरियट ही तू सोविय...
-
"सबसे खतरनाक होता है इश्क़ का नॉन रिस्पोंसिव हो जाना, ब्वॉयफ्रेंड शुदा लड़की से मोहब्बत होना और तड़प का बढ़ते जाना" पाश अगर विद्...
-
कहां पूरा एटम था, अब क्वॉर्क्स हो गया हूं तेरी मोहब्बत में कार्ल मार्क्स हो गया हूं तेरा इश्क बुर्जुआ था, मैं रहा प्रॉलेटेरियट ही तू सोविय...
-
मेरी डायरी का वो आखिरी पन्ना -4 • मेरी डायरी का वो आखिरी पन्ना-3 • मेरी डायरी का वो आखिरी पन्ना-2 • मेरी डायरी का वो आखिरी पन्ना-1 वो ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें