रविवार, 20 जुलाई 2014

आईना दिल का प्रतिबिंब होता है दिल आईने का स्वरूप होता है कुछ लोग आईने में बाहरी रूप देखते हैं कोई बिरला ही मन- दर्पण में अपने गुनाहों का धूमिल रूप देखता है वास्तव में वो ही इंसान सच का स्वरूप होता है गायत्री शर्मा


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