रविवार, 20 जुलाई 2014

दिल में गमों का सैलाब मत रखना अपनी गलतियों को कभी तुम अस्वीकार मत करना तुम कितने भी विश्वासपात्र हो किसी के तुम्हारी एक छोटी सी चूक ही काफी है उस विश्वास के नींव को हिलाने के लिए तब तुम पश्चाताप के आँसू से नहीं धो पाओगे अपने गुनाहों के दागों को कुछ लोग शायद इश्वर से भी महान होते हैं जो नहीं माफ करना चाहते इश्वर की बनाई हुई इस सजीव मूर्ति को कुछ ऐसी ही जिंदगी है जिसमें धोखे और विश्वास के जाल से बुनती ये जिंदगानी है गायत्री शर्मा


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