रविवार, 28 सितंबर 2014

वो आइना जो मेरा दिल था


आज देखा उन्होंने
खुद को आईने में

मेरा अक्स  उसमें
उनको नज़र आ गया

उन्होंने उठाया उसे
और पत्थर पे पटक दिया

वो आइना जो मेरा दिल था
हज़ार टुकड़ों में बदल गया

मगर टूट कर भी
वो अपना काम करता रहा ,

पहले एक अकेला था,
अब हजारो में हमको दिखाने लगा ||

दाऊ जी 

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