शनिवार, 7 मार्च 2015

मैं बेटी हूँ

ये फूल 
ये पंखुडिण्यां
 ये कोमल प्यारी 
तितलियाँ 

ये बसंत 
प्यारा सावन 
 कौन मुझसे 
रहता जुदा है

ये राखी होली दीवाली 
 ये ईद रमजान 
 कौन सा त्योहार 
मेरे बिना है, 

 मैं वेटी हूँ 
चमकती हूँ शक्तिपुंज सी, 
 तुम्हारे घरो में 
तभी तो उजाली है,

हैं अंधेरा वहाँ 
जहाँ मैं नही
भले सूर्य की 
कितनी भी लाली है, 

 शमसान ही है 
 वो जगह 
 जहाँ मेरी नही 
 किलकारी है, 

 डॉ. सोनल

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