शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

मेरा भी नेताओं सा कुछ हाल हो गया


मेरा भी नेताओं सा
कुछ हाल हो गया

कुर्सी पाने सी ललक
और नोटों जैसा प्यार हो गया

अब तो बस हर वक़्त
उसी के बारे में बात करता हूँ

दिन रात आने बाला
सत्ता सा स्वप्न हो गया है

मेरा भी नेताओं सा
कुछ हाल हो गया है

उसी का बखान सबसे
रटा-रटाया भाषणों सा स्टार्ट करता हूँ

सर्व विदित एक ही डायलोग
का बार बार इस्तेमाल करता हूँ

आजकल सेक्युलर छवि का
जोर से गुणगान करता हूँ

सभ्य सीदा बनने के चक्कर में
साला सफ़ेद सूट हो गया हूँ

इस इश्क ने मुझे साला
क्या से क्या बना दिया

बंजर जमीन पर भी
हरियाली का बीज वो दिया

कितना सीधा सच्चा था मैं
साला मुझको कमीना बना दिया

सोचता हूँ इतना बदलाव
मुझमे कैसे हो गया है

मेरा भी नेताओं सा
कुछ हाल हो गया है

दाऊ जी

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