रविवार, 16 दिसंबर 2018

दिल फरेब झूठ आया है करीने से सज संवर

उस पार मुन्तजिर है मुहब्बत का इक शहर
पर इक शर्त है के दर्दे दिल का दरिया पार कर

हवा को लग गई है शायद उसके आने की खबर
नई उम्मीद से सजे क्युं न मौसमों के पर

अभी तय करना है बड़ी दूर तलक दिलका सफर
खाक बनकर ए सांस राहे तमन्ना मे बिखर

बुलंदियों से तुझे दिल नजर न आयेगा
दिल ये नापना है तो हर छत से अना की उतर

सच धुल मे अटा है आईने के सामने
दिल फरेब झूठ आया है करीने से सज संवर

प्यार उसको बना देगा हयात का प्याला
वक्तके हाथों मे भले ही हो प्याला ए जहर

कल उसकी ठोकरों मे पडे होंगे कई ताज
जो आज चल रहा है बरहना पा नंगे सर

फुल बनकर के इक रोज वही खिलते है
बरसते है जो दिलों पे जुल्म के पत्थर

क्या पता कब डस ले उम्र की नागन
है वक्त तो देख ले आ चांद का मंजर

... कार्ल मार्क्स हो गया हूं

कहां पूरा एटम था, अब क्वॉर्क्स हो गया हूं तेरी मोहब्बत में कार्ल मार्क्स हो गया हूं तेरा इश्क बुर्जुआ था, मैं रहा प्रॉलेटेरियट ही तू सोविय...