बुधवार, 19 मार्च 2014

लघु कथा - राजधर्म



एक जंगल में एक बैल रहता था जो नित्य प्रतिदिन किसी न किसी घटना के लिए जंगल के राजा को दोष देता और उन्हें गालियों से सम्बोधित करता ......।परन्तु शेर ने सब जानते हुए भी कभी भी बैल से कुछ नही कहा उसके उल्टे जो कमियाँ वो निकालता उनको ठीक करने की कोशिश करने लगता,जिसके फलस्वरुप सारें जगंल में बात फैलने लगी कि अब शेर की ताकत खत्म हो चुकी है।इसका इतना असर हुआ कि सारे जंगलवासी उसकी भ्रामक बातों में धीरे-धीरे आने लगे और उन्हें लगने लगा की सचमुच शेर अब शक्तिशाली नही रह गया है।
दिनो दिन बढती बगावत से निसफिक्र शेर अपनी आरामगाह में लेटा रहा,उसके मंत्रियों को चिन्ता सताने लगी कि कहीं राज्य में विद्रोह न हो जाये और उनकी सत्ता उनसे झीन न ली जाये।उन्होने इस सम्बन्ध में जब राजा से बात करनी चाही तो राजा ने उनसे बात करने से मना कर दिया।ईधर दिनो दिन बढती लोकप्रियता से बैल अपने आपको बलवान मानने लगा और एक दिन उसने भरी सभा में शेर को मल्युद्ध के लिए ललकारा,मगर शेर के मना करने के बाद भी उसने शेर पर हमला कर दिया।वह झूठे अभिमानवश यह भूल गया कि वह क्या करने जा रहा हैं, अन्तत: शेर ने उसका अन्त किया।
सारे सभावासी शेर के इस रुप को लगभग भूल चुके थे उन्होनें जब इसका कारण जानना चाहा तो शेर ने कहा-:
बैल हमारे जंगल का बासी था इसलिए उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य,उसने शासन की गलत नीतियों के खिलाफ जो आवाज उठाई उससे लोगों तक हमारी कमियाँ पहुँची और हमें भी अपनी गलतियाँ मालूम हूँई और हमने उनका निदान किया,एक तरह से बैल ने अपना काम अच्छा किया लेकिन जब उसने जंगल के राजा पर हमला किया तो उसने राष्ट्रद्रोह किया ।इसका मतलब था अब उसपर उसी कानून के तहत सजा लागू होती है जिस कानून के तहत उसे संरक्षण प्राप्त था।बैल एक क्रान्तिकारी था इसलिए उसको शहीद का दर्जा मिलेगा एंव उसकी प्रतिमा जंगल के हर कौने पर लगवा दी जाये।
शेर का जबाब सुन सारे सभासद चुपचाप वहाँ से चले गये,लेकिन एक पेड़ पर बैठे कौवे ने ये सब देखा तो उससे रहा न गया और उसने जंगल के सबसे वृद्ध पक्षी गिद्ध से सवाल किया क्या शेर ने ये सच में सही किया??लेकिन ये प्रतिमा ???
गिद्ध ने कहा -: शेर ने अपने राजधर्म के तहत कार्य किया,लेकिन अन्तिम छणों में उसपर एक राजनेता हावी हो गया जिससे उसने बैल के समुदाय के मतो को पाने के लिए बैल को शहीद का दर्जा दिया और अन्त में उस पर क्रूक्र सोच हावी हो गई जिसके तहत उसने अपनी जीत और बैल की अन्तिम दशा की कहानी फैलाने के लिए जगह-जगह बैल की प्रतिमायें लगवाने को कह दिया।

मोरल-:??? बताऔ तो जानूँ?????

दाऊ जी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

असेसी और प्यार 😉

  इश्क़ और काम में एक रार सी ठन गई है, असेसी ही जबसे मेरा यार बन गई है ​खुद को कहती रही है वो baddie , और मुझको दिखी है हमेशा जो teddy ​वो ...