बुधवार, 19 मार्च 2014

लघु कथा - पेट की भूंख

लघु कथा -
एक जंगल में एक  बार अकाल पड़ गया सारे जानवर खुद को बचने के लिए एक दुसरे का खून पिने लगे ......हर जंगलवासी एक दुसरे के खून का प्यासा हो गया ......जो सबल होता वो निर्वल पर अपना आधिकार जामा लेता ...इस के चलते सरे जंगल में हाहाकार मच गया और जानवरों का पलायन बढ़ गाया|जंगल के राजा शेर को जब यह खवर मिली तो वह वहुत चिंतित हुआ ....उसने इस महाप्रलय से जंगल के बासियों को बचाने के लिए राजकोष के द्वार खोल दिए .यहाँ तक की अपना संचय किया हुआ भोज़न भी जंगल वासियों में बाँट दिया ..............जिससे जंगलवासियों को उचित आहार मिल गया |सारे जंगलवासी राजा के इस कार्य से अतिप्रश्न्न हुए और उन्होंने राजा के इस कार्य की खुले दिल से प्रशंशा की |
कुछ दिनों तक जंगल में मरकत पर विराम लगा रहा ....लेकिन कुछ दिनों बाद ही जंगल में एक - एक कर जानवरों की गिनती कम होने लगी ...सरे जंगलवासी चिन्त्तित हो उठे ..........उन्होंने राजा से एस सम्बन्ध में बात की और अपनी समस्याए बताई ....राजा ने ज़ल्द ही हत्यारे को पकड़ने का अस्वाशन दिया ........लेकिन वक़्त अपनी रफ़्तार से बढ़ता गया और जंगल में जानवर कम होते गए....आखिर हालत से परेशां हो कुछ जानवरों ने निगरानी दल का गठन करते हुए सारे जंगल में निगरानी करनी शुरू कर दी .......एक रात्रि को पेड़ पर बैठे एक उल्लू को राजा की गुफा से कोई आक्रति बहार निकलती दिखी ...और उसने उसका पीछा करना शुरू कर दिया ...कुछ देर बाद उसे किसी जानवर की चींख सुनाई पड़ी  और उल्लू ने शोर मचना शुरू कर दिया ...जिससे निगरानी दल के सदस्य सक्रिय हो गए और उस आकृति को चारों तरफ से घेर लिया .....उसने लाख कोशिश की मगर भाग नही पाया और पकड़ा गया ......और सबने उसे पीट पीटकर मार डाला सुबह हुयी तो सबने उस ज़गह शेर की लाश देखि ..................................सबको इस बात का आश्चर्य हुआ ....की जिस शेर ने अपना भोज़न तक दान कर दिया था वो यह हरकत कैसे कर सकता है ???
जंगल के सबसे बुज़ुर्ग व्रक्ष बरगद ने ज़ब जानवरों की हालत देखि तो उसने कहा -
"विपत्ति के समय उसने जंगलवासियों की मदद कर पहले राजा होने का और बाद में अपना भोज़न दान कर एक अच्छे नेक दिल होने का परिचय दिया था |परन्तु वो भी स्वाभाव गत एक जानवर था और उसे भी पेट की आग बुझानी थी इसलिए उसने अपने धर्म और कर्तव्य से ज्यादा अपने पेट को शांत करने एवं अपना जीवन बचाना ही उसने उचित समझा |पेट की भूखं किसी से भी कुछ भी करवा सकती है|

दाऊ जी 

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