लघु कथा -:
एक रास्ते पर कुछ नवजात कुकुट शावक अपनी माँ से दूर पड़े हुए थे शायद उनकी माँ अब एस दुनियाँ में नही थी |बेचारे भूख से बिलखते कुं कुं कुं की आवाज़ निकालते मदद की आस से लोगों को ताकते ...की शायद किसी लिबास में कोई देवता बनकर आ जाये और उनके पेट की भूंख शांत कर जाये |लेकिन लोग उनको देख कर चुपचाप बढ़ जाते|किसी को भी उनमे कोई रूचि नही थी और न ही कोई उनकी मदद करना चाहता था |भूंख से व्याकुल नन्हे से शावक अभी इतने समर्थ भी नही हुए थे की अपना भोज़न खुद जुटा सकें |उनकी दयनीय हालत और उनकी भूंख शायद वही समझ सकता था जिसने कभी एस र=तरह के दिन देखें हो|तभी उधर से एक गरीब दूध बेंचकर गुज़ारा करने बाला निकला,उससे उन पिल्लों की हालत न देखि गयी ....लेकिन वो कर भी क्या सकता था उसके पास कोई ऐशा पात्र नही था जिसमे वो उनको दूध डाल कर छोड़ देता ...आखिर कर उसने अपना इंसानी धर्म समझते हुए ...कुछ दूध सड़क पर ही डाल दिया .....ताकि वो भूखें पिल्लै उस दुधका सेवन कर अपनी भूखं को शांत कर सकें |
उसने अपना इंसानी कर्म किया लेकिन वहां से गुजरते कुछ लोगो के लिए वह मुर्ख बन गया था ....उनके लिए उसने अपव्यय किया था एक मूल्यवान पेय पधार्थ को उसने व्यर्थ में ही सड़क पर वहा दिया था |ये बात वह दूध बाला जानता था की उसके द्वारा सड़क पर भूखे पड़े पिल्लों को दूध पिला देने से कोई उन्हें रूपये देने बाला नही है ...ये उसका नुकसान ही है |परन्तु फिर भी उसने इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया था ...वह नित्य वहां से गुजरता और सड़क पर दूध डाल देता ..और उसका इंतजार कर रहे शावक उस दूध पर झपट पड़ते ...धीरे-धीरे वक़्त अपनी रफ़्तार से बढ़ता चला गया और एक दिन जब वो दूध बाला जाब वहां से गुजरता है तो वहां उसे कोई शावक नही मिलता है ....वह समझ जाता है की अब लोगों ने अपनी पसंद छंट ली होगी और कल तक लावारिशों का कोई न कोई पालक बन गया होगा |उसने अपने कदम बढ़ाये और आगे निकल गया |
आज उसके दूध की सबने प्रशंसा की और उससे पूछा की आज उसका दूध इतना गाढ़ा कैसे ??
उसने बड़ा ही संझिप्त उत्तर दिया - आज रास्तें में पिल्लै नही मिले |
उसके एस ज़बाब को सुनकर सब खामोश रह गए ....क्यूंकि वह नित्य जितना दूध पिल्लों को डालता उसी के बराबर वह उसमें पानी मिला देता था.....जिससे दूध पतला हो जाता था |उसके इस कृत्य की सब निंदा कर रहे थे लेकिन कुछ दुरी पर बैठे एक संत से जब उसके शिष्य ने जब दूध बाले के कृत्य का कारण पूछा तो वह बोले-
पिल्लों की जान बचाकर उनको दूध पिला कर उसने इन्सान होने का कर्तव्य निभाया ,दुश में पानी मिलकर उसने अपने व्यवसाय और आजीविका के साधन के साधन को बचा अपने परिवार के पेट पालने का फ़र्ज़ निभाया |
उसने पानी मिलकर गलत किया ,लेकिन एक अच्छे कार्य के लिए उसकी यह गलती माफ़ी पाने योग्य है |
एक रास्ते पर कुछ नवजात कुकुट शावक अपनी माँ से दूर पड़े हुए थे शायद उनकी माँ अब एस दुनियाँ में नही थी |बेचारे भूख से बिलखते कुं कुं कुं की आवाज़ निकालते मदद की आस से लोगों को ताकते ...की शायद किसी लिबास में कोई देवता बनकर आ जाये और उनके पेट की भूंख शांत कर जाये |लेकिन लोग उनको देख कर चुपचाप बढ़ जाते|किसी को भी उनमे कोई रूचि नही थी और न ही कोई उनकी मदद करना चाहता था |भूंख से व्याकुल नन्हे से शावक अभी इतने समर्थ भी नही हुए थे की अपना भोज़न खुद जुटा सकें |उनकी दयनीय हालत और उनकी भूंख शायद वही समझ सकता था जिसने कभी एस र=तरह के दिन देखें हो|तभी उधर से एक गरीब दूध बेंचकर गुज़ारा करने बाला निकला,उससे उन पिल्लों की हालत न देखि गयी ....लेकिन वो कर भी क्या सकता था उसके पास कोई ऐशा पात्र नही था जिसमे वो उनको दूध डाल कर छोड़ देता ...आखिर कर उसने अपना इंसानी धर्म समझते हुए ...कुछ दूध सड़क पर ही डाल दिया .....ताकि वो भूखें पिल्लै उस दुधका सेवन कर अपनी भूखं को शांत कर सकें |
उसने अपना इंसानी कर्म किया लेकिन वहां से गुजरते कुछ लोगो के लिए वह मुर्ख बन गया था ....उनके लिए उसने अपव्यय किया था एक मूल्यवान पेय पधार्थ को उसने व्यर्थ में ही सड़क पर वहा दिया था |ये बात वह दूध बाला जानता था की उसके द्वारा सड़क पर भूखे पड़े पिल्लों को दूध पिला देने से कोई उन्हें रूपये देने बाला नही है ...ये उसका नुकसान ही है |परन्तु फिर भी उसने इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया था ...वह नित्य वहां से गुजरता और सड़क पर दूध डाल देता ..और उसका इंतजार कर रहे शावक उस दूध पर झपट पड़ते ...धीरे-धीरे वक़्त अपनी रफ़्तार से बढ़ता चला गया और एक दिन जब वो दूध बाला जाब वहां से गुजरता है तो वहां उसे कोई शावक नही मिलता है ....वह समझ जाता है की अब लोगों ने अपनी पसंद छंट ली होगी और कल तक लावारिशों का कोई न कोई पालक बन गया होगा |उसने अपने कदम बढ़ाये और आगे निकल गया |
आज उसके दूध की सबने प्रशंसा की और उससे पूछा की आज उसका दूध इतना गाढ़ा कैसे ??
उसने बड़ा ही संझिप्त उत्तर दिया - आज रास्तें में पिल्लै नही मिले |
उसके एस ज़बाब को सुनकर सब खामोश रह गए ....क्यूंकि वह नित्य जितना दूध पिल्लों को डालता उसी के बराबर वह उसमें पानी मिला देता था.....जिससे दूध पतला हो जाता था |उसके इस कृत्य की सब निंदा कर रहे थे लेकिन कुछ दुरी पर बैठे एक संत से जब उसके शिष्य ने जब दूध बाले के कृत्य का कारण पूछा तो वह बोले-
पिल्लों की जान बचाकर उनको दूध पिला कर उसने इन्सान होने का कर्तव्य निभाया ,दुश में पानी मिलकर उसने अपने व्यवसाय और आजीविका के साधन के साधन को बचा अपने परिवार के पेट पालने का फ़र्ज़ निभाया |
उसने पानी मिलकर गलत किया ,लेकिन एक अच्छे कार्य के लिए उसकी यह गलती माफ़ी पाने योग्य है |

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