शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

हमारे मन में क्या छिपा हैं

हमारे man में जो छिपा हैं 
क्या जान पाओगे तुम कभी 

क्या पता कल हो न हो 
ये बताओगे क्या तुम कभी 

सच में इश्क हुआ था तुमसे
इसको सच बनोगे क्या तुम कभी

मानता हूँ नही कह पाया लेकिन
सच बताओ,मालूम नही था क्या तुमको कभी

हमारे man में जो छिपा हैं
क्या जान पाओगे तुम कभी

मेरा दिल सिर्फ एक दिल नही
इसे तुम क्या घर बनोगे कभी

जानता हूँ तुम झूट ही कहोगे
एक बात बताओ क्या तुम सच बोलोगे कभी

रखते हो दिल के पास आइना
उसका स्वरुप लोगे क्या तुम कभी

आ जाना जब man हो तुम्हारा
हम इंतजार करेंगे सभी

हमारे man में जो छिपा हैं
क्या जान पाओगे तुम कभी

जी.आर.दीक्षित

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